
लेखनी जितेंद्र की
हृदय की गहराइयों से उठती भावनाएँ,
प्रकृति और समाज के रंगों में लिपटी कविताएँ।
WELCOMEसाहित्य कोई शब्दजाल नहीं,
साहित्य कोई शब्दजाल नहीं,
बल्कि अंतर्मन का वह गीत है,
जो मौन में भी गूँजता रहता है।
THE ANTHOLOGY
चयनित रचनाएँ
NATURE / प्रकृति
वह शाम और बरगद की छांव
→
LOVE / प्रेम
अनकहे लफ्ज़ और वो एहसास
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SOCIETY / समाज
मौन बस्तियाँ
शोर की इस दुनिया में जब बस्तियाँ मौन हो जाती हैं...
"शब्द जब कागज़ पर उतरते हैं,
तो वे केवल अक्षर नहीं रहते,
वे किसी के दिल की धड़कन बन जाते हैं।"
तो वे केवल अक्षर नहीं रहते,
वे किसी के दिल की धड़कन बन जाते हैं।"
